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दिव्य ग्रंथ

श्रीमद् भगवद् गीता

अर्थपूर्ण जीवन के लिए कालातीत ज्ञान। श्रीकृष्ण और अर्जुन के दिव्य संवाद को अनुवाद, व्याख्या और आज के जीवन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन के साथ पढ़ें।

  • 18 अध्याय
  • 701 श्लोक
  • वक्ता — श्रीकृष्ण
  • वर्णन — संजय

आज का श्लोक

पूर्णिमा

ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति। निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते।।5.3।।

।।5.3।। हे महाबाहो ! जो मनुष्य न किसीसे द्वेष करता है और न किसीकी आकाङ्क्षा करता है; वह (कर्मयोगी) सदा संन्यासी समझनेयोग्य है; क्योंकि द्वन्द्वोंसे रहित मनुष्य सुखपूर्वक संसार-बन्धनसे मुक्त हो जाता है।

भगवद्गीता 5.3

अध्याय

भगवद्गीता के 18 अध्यायों का अन्वेषण करें

पहले अध्याय से पढ़ें
01

अर्जुनविषादयोग

Arjuna's Dilemma

47 श्लोक36 मिनट

02

सांख्ययोग

Transcendental Knowledge

72 श्लोक54 मिनट

03

कर्मयोग

Path of Selfless Service

43 श्लोक33 मिनट

04

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

Path of Knowledge and the Disciplines of Action

42 श्लोक32 मिनट

05

कर्मसंन्यासयोग

Path of Renunciation

29 श्लोक22 मिनट

06

ध्यानयोग

Path of Meditation

47 श्लोक36 मिनट

07

ज्ञानविज्ञानयोग

Self-Knowledge and Enlightenment

30 श्लोक23 मिनट

08

अक्षरब्रह्मयोग

Path of the Eternal God

28 श्लोक21 मिनट

09

राजविद्याराजगुह्ययोग

Yoga through the King of Sciences

34 श्लोक26 मिनट

10

विभूतियोग

Yoga through Appreciating the Infinite Opulences of God

42 श्लोक32 मिनट

11

विश्वरूपदर्शनयोग

Yoga through Beholding the Cosmic Form of God

55 श्लोक42 मिनट

12

भक्तियोग

The Yoga of Devotion

20 श्लोक15 मिनट

13

क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग

Yoga through Distinguishing the Field and the Knower of the Field

35 श्लोक27 मिनट

14

गुणत्रयविभागयोग

Yoga through Understanding the Three Modes of Material Nature

27 श्लोक21 मिनट

15

पुरुषोत्तमयोग

The Yoga of the Supreme Divine Personality

20 श्लोक15 मिनट

16

दैवासुरसम्पद्विभागयोग

Yoga through Discerning the Divine and Demoniac Natures

24 श्लोक18 मिनट

17

श्रद्धात्रयविभागयोग

Yoga through Discerning the Three Divisions of Faith

28 श्लोक21 मिनट

18

मोक्षसंन्यासयोग

Yoga through the Perfection of Renunciation and Surrender

78 श्लोक59 मिनट

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यदा यदा हि धर्मस्य…