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यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन

Yashoda Sees the Universe

krishna leelaबच्चों के लिए

बालक कृष्ण पर मिट्टी खाने का आरोप लगा। माता यशोदा ने डाँटकर उनसे मुँह खोलने को कहा। जब श्रीकृष्ण ने मुँह खोला, तो यशोदा ने उसमें मिट्टी नहीं, सम्पूर्ण ब्रह्मांड देखा — लोक, नक्षत्र, दिशाएँ और स्वयं गोकुल तथा अपने आपको भी। भगवान ने योगमाया से उस स्मृति को ढँक दिया और यशोदा पुनः वात्सल्य में लौट आईं।

श्रीमद् भागवतम् · Canto 10, chapter 81 मिनट

कथा

गोकुल में बाल-लीलाओं का क्रम चल रहा था। एक दिन बलराम और अन्य ग्वाल-बालों ने माता यशोदा से शिकायत की कि कृष्ण ने मिट्टी खाई है। यशोदा ने चिंतित होकर कृष्ण को बुलाया और डाँटा। श्रीकृष्ण ने पहले इनकार किया — "मैंने मिट्टी नहीं खाई, ये सब झूठ कहते हैं।" यशोदा ने कहा, "यदि नहीं खाई तो मुँह खोलकर दिखाओ।" और भगवान ने अपना मुख खोल दिया। यशोदा ने उस छोटे-से मुख में जो देखा, वह अकल्पनीय था। उन्हें उसमें सम्पूर्ण ब्रह्मांड दिखाई दिया — पृथ्वी, आकाश, दिशाएँ, पर्वत, समुद्र, द्वीप, वायु, अग्नि, चंद्रमा और नक्षत्रगण। उन्होंने काल, प्रकृति और जीवों को भी देखा। और सबसे विस्मयकारी यह कि उसी ब्रह्मांड में उन्हें गोकुल, नंद-भवन और गोद में कृष्ण को लिए हुए स्वयं यशोदा भी दिखाई दीं। यशोदा काँप उठीं। एक क्षण के लिए उन्हें आभास हुआ कि यह बालक साधारण नहीं, स्वयं परब्रह्म है। उन्होंने सोचा — यह कोई स्वप्न है, या मेरी बुद्धि का भ्रम, अथवा इस बालक की कोई दिव्य शक्ति? भगवान ने देखा कि यह ज्ञान माता के वात्सल्य में बाधा बन सकता है। जिस माँ को यह स्मरण रहेगा कि उसका पुत्र ईश्वर है, वह उसे डाँट न सकेगी, गोद में न ले सकेगी, उसके लिए व्याकुल न हो सकेगी। इसलिए उन्होंने योगमाया का आश्रय लिया और यशोदा की वह स्मृति ढँक दी। अगले ही क्षण यशोदा पुनः वही माँ थीं — उन्होंने कृष्ण को गोद में उठा लिया और उनका स्नेह पहले से भी गहरा हो गया।

सरल रूप

ग्वाल-बालों ने यशोदा से कहा कि कृष्ण ने मिट्टी खाई है। यशोदा ने डाँटकर कृष्ण से मुँह खोलने को कहा। कृष्ण ने मुँह खोला तो उसमें मिट्टी नहीं, पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया — तारे, पर्वत, समुद्र और स्वयं गोकुल तथा यशोदा भी। यशोदा एक क्षण के लिए समझ गईं कि यह बालक ईश्वर है, किंतु भगवान ने योगमाया से वह स्मृति ढँक दी, जिससे उनका वात्सल्य बना रहे।

बच्चों के लिए

एक दिन नन्हे कृष्ण के दोस्तों ने माँ यशोदा से शिकायत की — "माँ! कृष्ण ने मिट्टी खा ली!" यशोदा माँ को चिंता हुई। उन्होंने कृष्ण को बुलाया और पूछा, "क्या तुमने सच में मिट्टी खाई?" कृष्ण ने बड़ी भोली आँखों से कहा, "नहीं माँ, ये सब झूठ बोल रहे हैं।" माँ बोलीं, "अच्छा, तो अपना मुँह खोलकर दिखाओ।" कृष्ण ने मुँह खोल दिया — और माँ यशोदा हैरान रह गईं! उस नन्हे-से मुँह में मिट्टी नहीं थी। उसमें तो पूरा आकाश था, तारे थे, पहाड़ थे, नदियाँ और समुद्र थे। और सबसे अनोखी बात — उसमें गोकुल भी दिखा, और वहीं कृष्ण को गोद में लिए हुए स्वयं यशोदा माँ भी! माँ को एक पल के लिए लगा कि यह तो कोई साधारण बालक नहीं है। पर कृष्ण नहीं चाहते थे कि माँ उनसे डरने लगें — वे तो माँ का प्यार चाहते थे। इसलिए उन्होंने वह सब भुला दिया। अगले ही पल माँ ने कृष्ण को गोद में उठा लिया और पहले से भी ज़्यादा प्यार करने लगीं।

सार

यशोदा की स्मृति योगमाया से ढँक दी गई और वे पुनः वही माँ बन गईं, जिनके लिए कृष्ण केवल उनका पुत्र थे। इस घटना के बाद उनका वात्सल्य और गहरा हो गया, और गोकुल में बाल-लीलाओं का क्रम निर्बाध चलता रहा।

शिक्षा

ईश्वर की विराटता जान लेना एक बात है, और उनसे प्रेम कर पाना दूसरी। भगवान स्वयं अपना ऐश्वर्य ढँक लेते हैं, ताकि भक्त भय से नहीं, स्नेह से उनके निकट आ सके।

महत्त्व

श्रीमद्भागवत की यह लीला भक्ति परंपरा में वात्सल्य भाव का आधार मानी जाती है। यहाँ वही परब्रह्म, जिनका वर्णन उपनिषद् "नेति-नेति" कहकर करते हैं, एक माँ की डाँट सुनते हैं। यह प्रसंग बताता है कि भगवान भक्त के भाव के अधीन होकर अपना स्वरूप तक ढँक लेते हैं।

पात्र

कृष्ण

avatar

The eighth avatar of Vishnu, the cowherd of Vrindavan and the speaker of the Bhagavad Gita.

यशोदा

deity

The foster-mother of Krishna at Gokul.

मूल ग्रंथ

श्रीमद् भागवतम्